खानाबदोश यात्री

बचपन में बड़ा शौक था घूमने फिरने का , शौक परवान चढ़ा तो पहले गोपेश्वर उत्तराखण्ड, भारत और आज जापान।समय के साथ चन्द लम्हों में कहाँ से कहाँ पहुँच गए कभी आभास ही नहीं हुआ,छोड़िये जो भी है अच्छा है वस्तुतः मुझे कक्षा ६ में पढ़ाया गया राहुल सांकृत्यायन की “अथातो घुमक्क्ड़ जिज्ञासा” वाले पाठ का मूल जीवन में महत्व स्पष्ट होता दिख रहा है ।मेरे लिए पर्यटनशील रहना जीवन-अनुभव को व्यापक एवं नवीनतम बनाये रखने का जरिया है।

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टोक्यो जापान

बहुत कम शहर गुजरे हैं इस जीवनकाल में जहाँ ३-४ साल से अधिक अवधि का समय व्यतीत किया हो। प्रत्येक गर्मियों की छुट्टी  के बाद नयी जगह ,नया विद्यालय और तौफे में नए दोस्त। शायद यही सोच के साथ इस पेज का नाम खानाबदोश यात्री रखा गया। बहुत ही रोमांचक होता है जब आप अनजान देशों में घूमते हो, नई जगहों पर घूमने से व्यक्ति विभिन्न लोगों और उनकी सभ्यता तथा संस्कृति के संपर्क में आता है और इस प्रकार बहुत कुछ सीखने एवं जानने का मौका उसे मिलता है। ब्यवसायिक तौर पर मै एक इंजीनयर हूँ और भावनात्मक तौर पर एक घुमक्क्ड़ ब्यक्ति जो जितना घूमे उतना कम । यूँ तो अभी बहुत घूमना बाकि है पर आजकल न जाने ऐसा क्यों लगा की कुछ हिंदी में भी लेखनी होनी चाहिए। अब आप मेरा यात्रा विवरण का लुत्फ़ अन्ग्रेजी के साथ साथ हिंदी में भी ले सकते हैं, इसलिए मेरे आने वाले पोस्ट्स पर नजर बनाये रखें धन्यवाद !!

♥ कमर बाँध लो भावी घुमक्कड़ों, संसार तुम्हारे स्वागत के लिए बेकरार है – राहुल सांकृत्यायन ♥

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